Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
जगद्ब्रह्मतया सत्यमनिर्मितमभावितम् ।
अनिष्ठितं चान्यथा तु नाहं नावगतं च तत् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, यह
जगत् ब्रह्मरूप से सत्य है, वह न तो उत्पन्न हुआ है, न भावना का विषय है ओर न किसी
आधार में स्थित ही है । जगत् को यदि ब्रह्मरूप से सत्य न माना जाय, तो न मैं ही सत्य
ठहर सकता हूँ ओर न देखा गया यह जगत् ही सत्य ठहर सकता है