Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
बाह्यार्थवादविज्ञानवादयोरैक्यमेव नः ।
वेदनात्मैकरूपत्वात्सर्वदा सदसंस्थितेः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी स्थिति मेँ हम लोगों के मत से
बाह्य अर्थवाद ओर विज्ञानवाद में कोई विरोध नहीं होता, क्योकि बाह्यार्थवाद ओर विज्ञानवाद
दोनों की उक्तरीति से एकता ही है । किसी भी समय चेतन से भिन्न असत् बाह्य प्रपंच की
सत्ता हो ही नहीं सकती, यह अकाट्य सिद्धान्त है