Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वाग्राणुमये बीजे योऽस्मादग्रगतोऽणुकः ।
स स तत्तद्भवत्यग्रं बीजं च स्वात्मनि स्थितः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
कट के बीज में प्रसवशकित से युक्त सूक्ष्म आविकृत ब्ह्मस्त्तावानाभाय और उसमे वटादिविवर्त
दिखलाते हैं /
सबके सारभूत अत्यन्त सूक्ष्म भाग से सम्पन्न बीज में जो-जो सारभूत अति सूक्ष्म वस्तु है, वह
सब परमात्मा ही है। इसी सारभूत वस्तु से शाखा आदि में तत्-तत् उत्तरोत्तर कार्य में अग्रस्थानीय
बीज होता है और वह अपने स्वरूप में स्थित रहता है