Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 78
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 78 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 78
संस्कृत श्लोक
अविनाशिनि भूतानि स्थितानि परमे शिवे ।
व्योम्नीव शून्यतोल्लासाः सर्गवर्गा निरर्गलम् ॥ ७८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह सम्पूर्ण प्राणियों एवं उनके भोग्य सृष्टियों की विवर्तरुप स्थिति शाश्वत ब्रह्म में ही हैं,
यह कहते हैं।
अविनाशी परम शिव में ये सभी भूत स्थित हैं । उसी में ये सारी सृष्टियाँ बेरोक-टोक ऐसे
स्थित हैं, जैसे आकाश में शून्यता के उल्लास