Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
विदो वित्त्वं जगद्भ्रान्तिरवित्त्वं तु न विभ्रमः ।
वित्त्वावित्त्वे त्वदायत्ते चित्ताचित्ते यथा तव ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए ज्ञाता पुरुष का जगत्
को जगद्रूप से जानना ही जगत् की भ्रान्ति है तथा जगत् को जगद्रूप से न जानना ही सारे
भ्रमो की शान्ति है । अतः हे श्रीरामजी, स्मृति और विस्मृति जैसे आपके अधीन है, वैसे ही
इस संसार को जानना ओर न जानना भी आपके अधीन है