Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
एतद्रूपमविद्यायाः प्रेक्षिता यन्न लभ्यते ।
प्रेक्षिता लभ्यते चेत्सा तद्विद्यैव पराभवत् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
आगे कही जानेवाली बातो में उपयोगी होने के कारण उम्र विद्या के विरुद्ध अविद्या का
निरूपण करते हैं /
हे श्रीरामजी, अविद्या का एकमात्र यही स्वरूप है कि प्रमाणों द्वारा भलीभाँति विचारपूर्वक
देखने से वह कहीं उपलब्ध न हो और विचारपूर्वक देखने से यदि उपलब्ध हो, तो फिर वह परा
विद्या ही है