Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
प्रत्यक्षमपि दुर्लक्ष्यं परोक्षमपि चाग्रगम् ।
चिद्रूपमेव च जडं जडमेव चिदात्मकम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रत्यक्ष होने पर भी वह इन आँखों से दुर्लक्ष्य तथा परोक्ष होने
पर भी वह साक्षीरूप से सामने स्थित हे । चिद्रूप भी जड़ यानी जगद्-रूप से विवर्तित तथा जड़
जगत् आदि के रूप से भासित हो रहा भी वह ब्रह्म वस्तुतः शुद्ध चिन्मात्रस्वरूप ही स्थित है