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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अचेतनादिदं सर्वमुपलस्येव शाम्यति । शून्याख्यातः परालीनचित्तस्य चित्त्वभावनात् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

परब्रह्म अशेषरूप से विलीनचित्त का - पत्थर के सदुश बाहर का परिज्ञान न होने से और भीतर चितिरूपता की भावना होने से शून्यरूप संज्ञा को प्राप्त कर यह सब द्रश्य प्रपंच शान्त हो जाता है