Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अज्ञजीवितनद्यास्तु रसनात्यन्तभीषणाः ।
आवर्ता वृत्तिविक्षोभकल्लोलाः सहवाहिनः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
ओर
जो अज्ञानी हैं, उनकी आयुरूप नदियाँ तो अनेक तरह की दुःख क्रन्दनों की ध्वनियों से अत्यन्त
भयंकर रहती हैं । बाह्यवृत्तियों से उत्पन्न अनेक विक्षोभरूप कल्लोल ही उनके साथ-साथ
बहनेवाले आवर्त रहते हैं