Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
द्वैताद्वैतसमुद्भेदैर्वाक्यसंदर्भविभ्रमैः ।
मा विषीदत दुःखाय विबुधा अबुधा इव ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यही सिद्धान्त एकमात्र शान्ति का कारण हैं, दूस्सरी-दुस्री कल्पनाओं में तो केवल वावियों
का कलहमात्र होने के कारण मिथ्या कण्ठशोषण ही है, इस आशय से उन वादियों को लक्ष्य
कर कहते हैं।
हे पण्डितमानी वादिगण, आप मूर्खों के सदृश द्वैत, अद्वैत आदि अनेक तरह के संकल्पो से
तरह-तरह के कलहरूप वचनो का विचार कर दुःख के लिए व्यर्थ के कण्ठशोषण रूप विषाद को
मत प्राप्त कीजिये । परम पुरुषार्थ के हेतुभूत इसी सिद्धान्त का आप अवलम्बन कीजिए