Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अहंभावनया बोधे वासना घनतानवा ।
विपश्चित्संगमाभ्यासात्पाण्डित्यमिव मूढता ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना के उच्छेद में कौन उपाय है 2 इस प्रश्न पर कहते है /
जैसे पण्डितो के संसर्ग से बढ़े हुए अभ्यास से मूढता क्षीण होकर विद्रत्ता के रूप मेँ परिणत हो
जाती है, वैसे ही “अहं ब्रह्मास्मि की भावना से दिन-पर-दिन अत्यन्त क्षीणता को प्राप्त हुई
वासना ही मुक्ति के रूप में परिणत हो जाती है