Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
नेह द्रष्टा न भोक्तास्ति नाऽस्तिता न च नास्तिता ।
यथास्थितमिदं शान्तमेकं स्पन्दि सदाब्धिवत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
भूमिकाओं के अभ्यास में तत्पर युय॒ुक्ष किस तरह देखे, यह बतलाते हैं /
न द्रष्टा है, न भोक्ता है, न अस्तिता है ओर न नास्तिता है, किन्तु सदा समुद्र के समान
परिपूर्ण, प्रारब्ध प्राप्त बाधित व्यवहार के निमित्तभूत, एक, शान्तस्वरूप यथास्थित यह सब
ब्रह्म ही है