Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तस्मात्सर्वमनाश्रित्य व्योमवत्समुपास्यताम् ।
अपुनःस्मरणं श्रेय इह विस्मरणं परम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामजी, सबको छोड़कर
आकाश के समान निर्मल आत्मा की ही एकमात्र आप उपासना कीजिये । विषयों का पुन: स्मरण न
होना ही श्रेय है, अतः भूमिकाओं के अभ्यास द्वारा एकमात्र सांसारिक विषयों की विस्मृति को ही इस
व्यावहारिक जगत् में सिद्ध करना मुमुक्षु पुरुषों का परम कर्तव्य है