Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अबोधस्त्वनयोः श्रेयान्बोधो दुःखाय चैतयोः ।
तस्मात्सदेव बुद्ध्यस्व माऽसद्बुद्ध्यस्व राघव ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, वेदनशब्द ओर उसके अर्थ का न जानना उत्तम हे तथा
उनका ज्ञान होना दुःख है, इसलिए आप अविनाशी तटस्थ आत्मस्वरूप को जानिये और त्रिपुटीभान
के अन्तर्गतवृत्ति से युक्त चेतन के आभास को आत्मरूप मत समझिये