Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
एतौ वेदनशब्दार्थौ रज्जुसर्पभ्रमोपमौ ।
असत्यावुदितौ विद्धि मृगतृष्णाम्भसा समौ ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
संसारदशा में प्रसिद्ध यह वेदन शब्द और इसका अर्थ ये दोनों एक तरह से
रज्जूसर्पभ्रम के सदृश मिथ्या हैं । मिथ्यासामग्री से मिथ्यारूप उत्पन्न हुए हैं और मृगजल के सदृश
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