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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

मोक्षलक्ष्म्या विलासिन्या व्यसनोपहता इव । अर्धसुप्तप्रबुद्धाभाः कामप्यवनिमागताः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

विविध विषय-विलासों से परिपूर्ण मोक्षलक्ष्मी से ज्ञानी पुरुष ऐसे अपने देह आदि के भान को भूले रहते हैं, जैसे अत्यन्त आसक्तिरूप व्यसन से साधारण पुरुष अपने देह आदि के भान को भूले रहते हैं और किसी अनिर्वचनीय पंचम आदि भूमिकाओं में प्राप्त होकर अर्धसुप्त एवं अर्धप्रबुद्ध के सदृश रहते हैं