Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
प्रवाहपतिते कार्ये ईषत्स्पन्दा अतन्मयाः ।
घूर्णमाना इव क्षीबा यन्त्रसंचारिता इव ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी पुरुष प्रारब्ध प्राप्त कार्य में
कुछ प्रवृत्त हुए-से दिखाई देते हैं, परन्तु ये घूर्णमान शराब के नशे में उन्मत्त पुरुष के सदृश तथा
यन्त्र से संचालित काठ की मूर्तियों के सदूश उसके अभिमान से रहित रहते हैं