Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
शुद्धज्ञानैकरूपात्मा शुद्धज्ञानमयात्मनि ।
अन्यसंविद्दृशोन्मुक्तः स्वान्यद्वक्तुं न वेद्म्यहम् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
विशुद्ध ज्ञानमय
आत्मा में मैं विशुद्ध साक्षीरूप आत्मा ही हूँ, मुझमें भेदज्ञान की दृष्टि ही नहीं है और न प्रत्यागात्मा
से भिन्न कुछ अणुमात्र भी कहने की इच्छा रखता हूँ