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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । न मे वक्तुमशक्तत्वाद्युक्तिक्षय उपस्थितः । किंतु प्रश्नस्य कोट्यास्य तूष्णीमेवानघोत्तरम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे अनघ, मुझमें कहने की शक्ति नहीं है, इसलिए उत्तर-युक्ति न रही, यह बात नहीं है, किन्तु यह प्रश्न चरम सीमा का होने के कारण चुपचाप स्थित रहना ही इसका उत्तर है