Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
प्रशान्तसर्वेच्छमशङ्कमच्छचिन्मात्रसंस्थोऽखिलकार्यकारी ।
आत्मैकरामः परिपूर्णकामो भवाभयो राम शमाभिरामः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीका स्पष्टीकरण करते हुए उपसहार करते हैं /
हे रामभद्र, सब इच्छाओं से निर्मुक्त एवं अशेष शंका से रहित होकर सब कर्म करते हुए
भी आप चैतन्यमात्र में स्थित रहिए । एकमात्र अपनी आत्मा मेँ ही रमण कीजिए । समस्त
कामनाओं से परिपूर्ण होकर आप निर्भय हो जाइए और परमशान्ति का अवलम्बन कर सब
ओर चमकने लग जाइये