Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
बीजाङ्कुरविकल्पानां क्रियापुरुषकर्मणाम् ।
ऊर्मिवीचितरङ्गाणां नास्ति भेदो न वस्तुनि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
बीज, अंकुर आदि
विकल्पों का परस्पर; क्रिया, पुरुष एवं दैव का परस्पर तथा ऊर्मि, वीचि और तरगों का परस्पर
तनिक भी भेद नहीं है एवं अधिष्ठान में भी कुछ भेद नहीं है