Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
न बीजाङ्कुरयोर्भेदो विद्यतेऽग्न्यौष्ण्ययोरिव ।
बीजमेवाङ्कुरं विद्धि विद्धि कर्मैव मानवम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि बीज के अन्दर रहनेवाली शक्ति ही अकृर हैं, यों मानें; तो भी शक्ति और थक्तिमान् में
क भेद नहीं हैं, यह कहते हैं ।
बीज और अंकुर में, अग्नि और उष्णता के सदुश, कोई भेद नहीं है । हे श्रीरामजी, आप बीज
को ही अंकुर जानिये और कर्म ही को मानव जानिये