Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
बीजाङ्कुराणां पुरुषकर्मणां जन्मकारिणाम् ।
दैवशब्दार्थयुक्तानां तत्त्वं वद विभो पुनः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र ने कहा : हे विभो, बीजरूप तथा कार्यरूप पुरुष के कर्मों का, जो जन्मरूप संसार
अनर्थ के उत्पादक तथा दैव से (अदृष्ट) सम्बद्ध हैं, स्वरूप मुझसे फिर कहिए यानी यद्यपि आपने
इन कर्मों का तत्त्व पहले यत्र-तत्र कहा है परन्तु फिर भी एक साथ मिलाकर कहिए
सर्ग सन्दर्भ
सत्ताईसवाँ सर्ग समाप्त अड्डाईसवाँ सर्ग॑ बीजरूप और कार्यरूप तथा जन्म के हेतुभूत पुरुषकर्मो के, जो अद्ृष्टरूप निमित्त से सम्बद्ध है, स्वरूप का पुनः वर्णन।