Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
एतेन राघव विवेकपदेन शान्तिमासादयोदयवता मनसा विहर्तुम् ।
मा दीनतां व्रजतु रागमयी मतिस्ते क्षीणा क्षणादसलिलेव शरद्धनाली ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामभद्र, आप इस मंकि ब्राह्मण द्वारा स्वीकृत उपाय का अवलम्बन कर ज्ञान में उन्नतिशील
विवेकी मन से स्वात्मानन्द में विहार करने के लिए शान्ति प्राप्त कीजिए । आपकी बुद्धि रागयुक्त
बनकर, जलरहित शरत् के मेघों के सदृश, विवेक रहित हो दीन न बन जाय