Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
व्यूढानां वासनावातैर्नृतृणानामितस्ततः ।
तान्यापतन्ति दुःखानि तत्र वक्तुं न पार्यते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए स्व-स्व वासनारूपी वायुओं द्वारा
इधर-उधर उड़ाये गये उपनिषद्दृष्टि से च्युत पुरुषरूपी तिनकों के ऊपर वे सब दुःख गिरते हैं, जो
कि लोक में तथा शास्त्रों में वर्णित हैं। कितने गिरते हैं, इस विषय में कोई कह ही नहीं सकता