Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
बोधावबुद्धं यद्वस्तु बोद्ध्यकर्केतेयते ।
नाबोधं बुध्यते बोधो वैरूप्यादिनान्यता ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार करने पर चिन्मयकय से स्फुरित हो रहे पदार्थों की विदैकरसता ही अन्त में चलकर
प्राप्त हो जाती है, इस आशय से कहते हैं /
जो वस्तु तत्त्वज्ञान से ज्ञात होती है वह ज्ञानस्वरूप ही कही जाती है, क्योकि विरुद्धरूप होने
से ज्ञान का अभाव ज्ञानरूप से नहीं जाना जाता | इसलिए ज्ञेय और ज्ञान, ये दोनों एकरूप हैं