Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
उदितो न विकारार्को वासनारजनीक्षयः ।
अवस्तु वस्तुवद्बुद्धं मत्तश्चित्तमतंगजः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, यही कारण है कि चित्तरूपी
मतवाले हाथी ने अवस्तु को ही वस्तुवत् मान लिया है हे मुने, ये इन्द्रियाँ मुझे काट खा रही हैं, न
जाने मेरी क्या दशा होगी ?