Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
ममेत्युक्तवतो मङ्किर्विनिपत्य स पादयोः ।
उवाचानन्दपूर्णाक्षमिदं मार्गे वहन्वचः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, यों मेरे कहने पर उस ब्राह्मण मंकि ने मेरे चरणों पर
लोटकर आनन्दजलपरिपूर्णं आँखों से युक्त हो मुझे मार्ग में ले चलते हुए यह कहना आरम्भ
किया
सर्ग सन्दर्भ
तेईसवाँ सर्ग समाप्त चौवीसवों सर्ग देह, इन्द्रिय, मन तथा बुद्धि आदि के दोषों के सहित सांसारिक अपने दुःखसमूह का मंकि द्वारा वर्णन ।