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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अक्षुब्धस्वानिलालोकजलभूशान्तिशालिनीम् । ततां शून्यां महारम्भां ब्रह्मसत्तामिवामलाम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

धूलि आदि के उड़ने से अक्षुब्ध हुए आकाश, झंझावात, धूप, मृगतृष्णा के जल और तप्त हुई पृथिवी की शान्ति से शोभायमान, विस्तृत, शून्य तथा दुर्गम होने के कारण जानेवाला के द्वारा किये गये महान्‌ प्रयत्नो से युक्त निर्मल ब्रह्म सत्ता की नाई वह महाजंगल था