Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चिरं मनुष्यदेशेऽस्मिन्निर्जनग्राममध्वनि ।
अधराध्वग विश्रातिं विश्रान्तोपि न लप्स्यसे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
निम्नमार्ग के पथिक (८) पूर्व के गाँवों में अनन-पान-आश्रय आदि के लाभ द्वारा कुछ विश्रान्तिसुख
पा जाने पर भी अतिथियों का सत्कार करनेवाले पुरुषों से शून्य गाँव में रहकर इस मनुष्य देहरूपी
देश में आगे चलकर चिरकाल तक विश्रान्ति नहीं प्राप्त कर सकोगे (५४)