Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अपरिज्ञातनीरागमार्ग मित्र शुभाकृते ।
मरुमार्गमहारण्यपान्थ स्वागतमस्तु ते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अकिंचन पुरुषों के
संचारयोग्य मार्ग का परिज्ञान न रखनेवाले मरुमार्ग के, महाजंगल के पथिक, हे शुभकृते मेरे मित्र,
(यहाँ मेरे दर्शन से सभी दुःखो के मूल का क्षय हो जाने के कारण) तुम्हारा स्वागत हो