Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
देहे यद्यप्यशेषेऽस्मिन्बहिरन्तश्च वेदनम् ।
विद्यते तत्तथाप्यत्र शुक्रेऽस्ति घनवासना ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त देह की अपेक्षा वीर्य में इसका विशेषाभिमान अनुभवसिद्ध है यह बतलाते हैं /
यद्यपि समस्त शरीर में बाहर और भीतर सर्वत्र वह ज्ञान रहता है, तथापि इस वीर्य में इसको
सबसे अधिक अहमभिमान रहता है