Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verses 8–13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, verses 8–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 8-13
संस्कृत श्लोक
सतां नयेनोत्तमसेवया च प्रश्नेन चोदारकथागतेन ।
विन्दन्ति वेद्यं सुधियोऽप्रमत्ता वसिष्ठसङ्गादिव राघवाद्याः ॥ ८ ॥
तृष्णावरत्रादृढबन्धबद्धा ये ग्रन्थयोऽज्ञस्य हृदि प्ररूढाः ।
सर्वे हि ते मोक्षकथाविचाराद्बाला ह्यबाला इव यान्त्यभेदम् ॥ ९ ॥
मोक्षाभ्युपायान्सुमहानुभावान् ज्ञास्यन्ति ये तत्त्वविदां वरिष्ठाः ।
पुनः समेष्यन्ति न संसृतिं ते कोऽर्थः सुताऽन्येन बहूदितेन ॥ १० ॥
बहुश्रुता ये प्रविचार्य सम्यक्प्रबोधितार्थे कथया जनाय ।
सन्तो वदिष्यन्ति पुनः शिशुत्वं न ते प्रयास्यन्ति किमन्यवाक्यैः ॥ ११ ॥
ये वाचयिष्यन्त्यनपेक्षितार्था ये लेखयिष्यन्ति च पुस्तकं वा ।
ये कारयिष्यन्त्यपि वाचकं वा व्याख्यातृयुक्तं शुभमार्यदेशे ॥ १२ ॥
ते राजसूयस्य फलेन युक्ता मुहुर्मुहुः स्वर्गमुदारसत्त्वाः ।
मोक्षं प्रयास्यन्ति तृतीयजन्मलाभेन लक्ष्मीमिव पुण्यवन्तः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
ध्यान से कल्पित अन्य आकाश में चिरकाल तक विहार आदि की अनुभूति के
भ्रमों से, जिनका कि लीलोपाख्यान आदि में विस्तार से प्रदर्शन किया गया हे, धारणा से सर्वाधार ब्रह्म
में विश्राम से देहत्याग के क्रमों से, संकल्पमय नवीन निर्माणं से, स्वप्न में देखे गये जगत् के दुःखों से,
शुक्ति रजतां के अनुभवों से, स्वप्न में अपनी मृत्यु के दर्शनों से, अभिन्नरूप पवन स्पन्दो से, अनन्य
जल-द्रवों से, इन्द्रजाल नगरों की राशियों से गन्धर्व-नगर के समूहों से, माया से प्रदर्शित जलपूर्णं
महाप्रवाहवाले मृगतृष्णानदी के वेगो से, सृष्टि के उत्तर काल में यानी प्रलय में वर्णित महान् वेगवाले
वायु के स्पर्शो से, द्विचन्द्र के अनुभवों के उदयों से, मद से (नशे से) बेहोशी होने पर मालूम पड रहे
नगर-कम्पनों से, उत्पात आदि से शुभाशुभ सूचन के बिना ही भ्रान्ति से प्रतीयमान भू-कम्पों से,
बालक के यक्ष आदि के अनुभवों से, आकाश में केशो के वर्तुलाकार गोलो के दर्शनों से इत्यादि तथा
इनसे अतिरिक्त अपने को अनुभूति करानेवाले अन्यान्य दृष्टान्तो से आपने मेरी दुश्यदुष्टि का परिमार्जन
कर दिया है । यह मेरे लिये परम सोभाग्य की बात है