Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यथैते कल्पनालोका अयं लोकस्तथैव नः ।
यथा काल्पनिको वातो लोकालोकास्तथैव ते ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
"साध्व्यसाध्वी गृहे भर्तुः संस्थिता तपसा परा। इस प्रश्नांश में भी यही समाधान है, ऐसा कहते हैं ।
जो साध्वी स्त्री ध्यान में लाखों ध्यानकर्ताओं की स्त्री बनी उसकी काल्पनिक अनुभूति उनके
अन्तःकरणउपहित साक्षी में स्थित है