Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
संकल्पस्वप्नलोका ये तव भान्ति दिवानिशम् ।
त एव तादृशाश्चान्ये संकल्पेन स्थिरीकृताः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
धर से बाहर निकले बिना जीव सप्तद्वीप का पति कैसे हुआ ? इस प्रश्न का भी इससे समाधान हो
चुका, ऐसा कहते है ।
जो घर से बाहर न निकला हुआ जीव सप्तद्वीपेश्वर होकर स्थित है उसका भी अपने चिदाकाश में
वह कल्पनासिद्ध राज्य भासता है