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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 40

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 40

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उसकी प्राप्ति होने पर अन्य अर्थ के परित्यागमात्र से एकमात्र तन्निष्ठ होना ही उपाय है उससे अवश्य ही उसकी प्राप्ति होती है, ऐसा कहते है । सकल वस्तुओं के निरास द्वारा जिस जिस वस्तु का चिरकाल तक ध्यान किया जाता है उसकी अवश्य ही प्राप्ति होती हे । लौकिक कार्यो में भी अन्य भावित वस्तु वैसे ही अवश्य प्राप्त होती हे