Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

कार्यकारणभावाच्चेत्कथैवात्र न विद्यते । व्योम्नोऽनन्तस्य सिद्धस्य किं कथं किल जायते ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

सब प्रश्नो का स्वमुख से अथवा अर्थतः समाधान कर जगत्‌ का ब्रह्म ही तत्त्व है, यो उपसंहार करते हैं । हे राजन्‌, जैसा तुमने मुझसे पूछा था उसके अनुसार यह सब मैने तुमसे कहा । यह सारा का सारा निराकार जगत्‌ चिन्मात्र की कल्पना ही है