Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 210 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कल्पनात्मनि संसारे संकल्पोऽकृत्रिमं फलम् ।
चिन्मात्रमभितोऽदानाद्दानाद्वाऽस्तु यथोदितः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
शत्रु द्वारा किये गये अभिचार के (तंत्र, मंत्र, शाप आदि द्वारा मारण के) प्रतीकार
से रहित शास्य की संवित् शत्रु की कलुषित संवित् को (मरण आदि को) तुरन्त उसी समय जान
जाती हे । कवच पहने तथा शस्त्रास्त्र से सजे हुए शत्रु को कवच न पहने हुए शस्त्रास्त्रविहीन विश्वस्त
पुरुष के शरीर को बाण, तलवार, भाले आदि से घायल करने में क्या देर लग सकती है ?