Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 21, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 21, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
आत्मज्ञानं विदुर्ज्ञानं ज्ञानान्यन्यानि यानि तु ।
तानि ज्ञानावभासानि सारस्याऽनवबोधनात् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
अनात्मशासप्रो के अभ्यास में तत्पर हुए भी पुरुष तत्-तत् अर्थज्ञानों से सम्बद्ध होते दिखाई
देते है; उनके दुल्य ये श्रीरामचन्द्रणी न हों; इसलिए आत्मज्ञान में विशेषता दशति हैं ।
आत्मज्ञान को ही ज्ञान कहते हैं, आत्मज्ञान से भिन्न जो अन्य ज्ञान हैं वे सब जगत् और जीव
के अधिष्ठानभूत ब्रह्म के बोधरूप न होने से ज्ञानावभास ही हैं