Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 21, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 21, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
वसनाशनमात्रेण तुष्टाः शास्त्रफलानि ये ।
जानन्ति ज्ञानबन्धूंस्तान्विद्याच्छास्त्रार्थशिल्पिनः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र भोजन, वस्त्र आदि से सन्तुष्ट
होकर भोजन आदि की प्राप्ति को ही जो शास्त्राध्ययन का फल मानते हैं, उस शास्त्रार्थ कथा का
अभिनय करनेवालों को नटादि शिल्पियोँ के समान ही समझना चाहिए