Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
मनश्चन्द्रमसो जातं मनसश्चन्द्र उत्थितः ।
जीवाज्जीवोऽथवैकैषा सत्ता द्रवजलाङ्गवत् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
व्यष्टियन और व्यष्टिमन से उपहित जीव - इन दोनों का तो विराट् कारण है, अतः उनकी
समानता केसे 2 इस पर कहते हैं /
मन चन्द्रमा से उत्पन्न हुआ है और मन से चन्द्रमा उत्पन्न हुआ है, समष्टि जीव से व्यष्टिजीव
उत्पन्न हुआ है अथवा समष्टिजीव और व्यष्टिजीव दोनों की सत्ता एक ही है, अतः भेद का अवसर
ही नहीं है, इसलिए उसमें कारणत्व का प्रसंग कैसे हो सकता है ?