Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 197

14 verse-groups

  1. Verses 1–2एक सौ पचानबेवाँ सर्गं समाप्त एक सौ छानबेवाँ सर्ग जिस प्रकार गुरु, शास्त्र आदि से उपदिष्ट…
  2. Verses 3–4श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, हे मुनिनायक, आपसंशयरूपी मेघ के लिए शरत्काल के सदृश है…
  3. Verse 5हे सम्मान्य, जो यह सद्‌ ब्रह्म केवल स्वानुभवमात्र ज्ञेय है वह महान्‌ पुरुषों की वाणी से भ…
  4. Verse 6ऐसी अवस्था में सकल संकल्प-विकल्पों से शून्य परम ज्ञेय ब्रह्म केवल संविद्रूप तीनों अवस्थाओ…
  5. Verse 7वह प्रतियोगी, व्यवच्छेद और सांख्यभेद माननेवाले वादियोके तुच्छातितुच्छ यानी क्षुद्रतर प्रत…
  6. Verse 8विकल्परूपी सारवाले शब्द- अर्थवाले शास्त्रों से ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती हे, फिर हजा…
  7. Verse 9हे ब्रह्मन्‌, इसलिए तत्त्व के विज्ञान में गुरु, शास्त्र आदि कारण हैँ, अथवा अकारण है ? इस…
  8. Verse 10शास्त्र नाना शब्दों ओर अर्थो का भण्डार है ओर परमपद अनाम है । यानी शब्दप्रवृत्ति निमित्तशू…
  9. Verse 11हे रघुकुलदीपक, तथापि जैसे यह शास्त्र आदि उत्तम ज्ञान तथा उसके फल मोक्ष के प्रति कारण हुआ…
  10. Verses 12–18कहीं पर चिरकाल से दुर्भाग्य में पड़े हुए बहँगी (काँवर) ढोनेवाले कीरक (कीरक देश के) लोग थे…
  11. Verses 19–22उन लकड़हारों में से कुछ भाग्यशाली लोग कुछ ही दिनों मे वन से उन विविध-रत्नों ओर सुवर्ण को…
  12. Verse 23इस प्रकार जब तक कि वे लोग नित्य उस वन में आते जाते थे इसी बीचमें एक स्थान पर उन्हें मणिश्…
  13. Verse 24उक्त चिन्तामणि से उन्हें समग्र विभूतियाँ प्राप्त हुई, अतः परम सुखी होकर वे वहाँ सुख से रह…
  14. Verses 25–34उन कीरकदेशनिवासी बहँगी ढोनेवाले लोगों को लकड़ियों के लिए किये गये उद्योग से ही बहुमूल्य उ…