Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, Verses 19–22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, verses 19–22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 197 · श्लोक 19-22
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
उन लकड़हारों में से कुछ भाग्यशाली लोग कुछ ही दिनों मे वन से उन
विविध-रत्नों ओर सुवर्ण को पा गये कुछ कीरक लोग चन्दन की लकड़ियाँ, कुछ केवडे ओर चम्पा के
फूल, कुछ लोग अच्छे-अच्छे फल बेचकर, चिरकाल तक आजीविका चलाते थे । कुछ अभागे ओर
अच्छी चीजों को खोजने मे अकुशल जंगली कीरक अच्छी वस्तुएँ न पाकर खराब खराब जलाऊ
लकड़ियाँ लाकर, बेचकर जीवनयापन करते थे । लकड़ियाँ बीनने के लिए उद्योगशील वे सबके सब
जंगल में पहुँचे। वहाँ जाकर उनमें से कुछ लोग रत्न आदि पाकर सबके सब दारिद्रयरूपी ज्वर से शीघ्र
ही उन्मुक्त होकर स्थित हुए