Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 44
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
इसलिए परिशेष से निर्दोष अपना पक्ष स्थित रहा, यह कहते है ।
इस कारण जैसे स्वप्न मे चिति पर्वत आदि के रूप से आत्मस्वरूप में स्थित रहती है वैसे ही निराकार
परमात्मा ही सर्ग आदि नाना आकारो के रूप से संविद्रूप स्वात्मा मेँ स्वप्न के समान स्थित हे