Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 74
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, जो जगत् सृष्टि के आदि में उत्पन्न नहीं हुआ ओर जिसका कभी
संभव नहीं है, जो असद्रूप ओर आभासशून्य है उसका अनुभव कैसे होता है ? यदि वह अत्यन्त असत्
है तो वह अर्थक्रियासमर्थरूप से अनुभूत कैसे होता है, यह भाव है ।