Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 68
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, चित्त के स्थितिकाल में चित्त के निरोध से होनेवाली चित्की
अचेत्योन्मुखता (परमात्मा की ओर प्रवण होना) कितने काल तक रहेगी ? यानी बहुत थोड़े समय तक
रहेगी, इसलिए निर्वाणपद प्रदान करनेवाली चित्त की अचित्तता कैसे उदित होती है ? यह मुझसे कहिये
यानी चित्त के नाश का ही उपाय मुझसे कहने की कृपा कीजिये