Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 44
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, "जीवन्मुक्त हम लोगों में नहीं” यह कह रहे आपने जीवन्मुक्तों में
भी अस्मत्-शब्द की प्रवृत्ति में निमित्तभूत अहन्ता प्रदर्शित की है ओर वह अहन्ता अबोध का कार्य
नहीं होनी चाहिये, क्योंकि उनमें अबोध की प्रसिद्धि नहीं है। अत: बोध ही अहन्तारूप परिणाम को
प्राप्त होता है, यह कहना पड़ेगा । उस अवस्था में उसकी बोधभिन्नता का निवारण करना कठिन ही
नहीं असंभव है । यह अहन्ता जब जीवाख्य पुरुष नहीं है तब इसका अनन्त त्रिविध परिच्छेदशून्य
निर्मल चिन्मात्र आपमें कहाँ से संभव है ?