Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
सर्वतोऽनुभवरूपयानया सत्तयोत्तमपदादभिन्नया ।
अन्तवर्जितमहाङ्गसङ्गया तिष्ठतीति पुरुषः परो विराट् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, ब्रह्म
से अभिन्न, अतएव अवधिशून्य एवं महान् व्यष्टि ओर समष्टि के देहसम्बन्ध से युक्त इस अनुभवरूप
अधिष्ठान -सत्ता से ही “तद्विवर्तो विराट् पुरुषः" इस वर्णित रीति से सब देश और सब कालो में
परम विराट पुरुष इस मायावृत ब्रह्म में अवस्थित रहता है