Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 86
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, verse 86 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 86
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
चित् में ही जड़ और अजड भेद की कल्पना मेँ भी स्वप्न ही दृष्टान्त है, यह कहते है।
जैसे मनुष्य निद्रावस्था में निज पाषाण की स्थिति का अनुभव करता हे वैसे ही परमात्मा भी इस
जड़ पदार्थो की स्थिति का अनुभव करता है