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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 73

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 73

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रेष्ठ पुरुष के संकल्प से जन्य वरशापआदि को लोग उसके विपरीत संकल्प से क्यो नहीं उलट सकते ? इस पर कहते है। शुद्ध चित्स्वभाववाले प्रजापति आदि ने जो जाना है और जो जैसा है उसे कीड़े की तरह अशुद्ध कोई पुरुष अन्यथा करने के लिए समर्थ नहीं हे